SHRAMIK MAZDOOR YA MAZBOOR | by Arun Yadav Arun | Neelam Publication
₹300.00 Original price was: ₹300.00.₹295.00Current price is: ₹295.00.
“श्रमिक:मजबूर या मजदूर” साझा काव्य संग्रह श्रमिक वर्ग को समर्पित है। श्रम दिवस के अवसर पर प्रकाशित साझा काव्य संग्रह “श्रमिक:मजदूर या मजबूर”” की प्रति आपके हाथों देखकर अपार प्रसन्नता हो रही है। प्रस्तुत साझा काव्य संग्रह श्रमिकों के गौरव, समस्याएं, दर्द, दशा एवं दुर्दशा, महत्ता जैसे विविध पक्षों पर रचनाकारों की अच्छी प्रस्तुति है। किसी खास रचनाकार की कविता का जिक्र कर अन्य कवियों की रचना को कमतर आंकना मेरा उद्देश्य नहीं है।
काव्य संग्रह में श्रमिकों पर आधारित स्तरीय रचनाओं को जगह मिली है। सभी रचनाकारों की रचना एक से बढ़कर एक है। मजदूर एक ऐसा शब्द है,जिनके बोलने से ही मजबूरी झलकती है। जिनके चेहरे पर हल्की सी उदासी और आंखों में काम मिलने की आशा दिखती है,दरअसल वे ही मजदूर हैं। सही मायने में देखें तो श्रमिक ही राष्ट्र निर्माणकर्ता हैं,विश्वकर्मा का सहभागी है। इतनी महत्वपूर्ण भूमिका निभानेवाले मजदूरों की स्थिति पूरे विश्व में कहीं भी ठीक नहीं है।
प्रस्तुत काव्य संग्रह में रचनाकारों ने काव्य के माध्यम से श्रमिकों के एक से एक दर्दनाक पक्षों को समाज और देश के सामने रखा है। प्रस्तुत साझा काव्य संग्रह श्रमिक पर आधारित है। रचनाकारों द्वारा प्रस्तुत सभी रचनाएं श्रमिकों के प्रति आत्मीय भाव से ओत प्रोत है और एक से बढ़कर एक है। सभी काव्य श्रमिक वर्ग के मजबूरी को समर्पित है। “सुबह की रेल पकड़ने,शाम से इंतजार है। खाते वक्त भैरव के झुंड,रोटी लपक लेने को तैयार है।।”” आशा है “श्रमिक :मजबूर या मजदूर “साझा काव्य-संग्रह पाठकों पर अपनी छाप छोड़ेगी । इसी आशा और विश्वास के साथ । श्रमेव जयते !! श्रमेव जयते !!
SHRAMIK MAZDOOR YA MAZBOOR | by Arun Yadav Arun | Neelam Publication
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