Andher Nagari Part 2
Andher Nagari Part 2 BY Dr. Dinesh Chandra Thapliyal (Author) Original price was: ₹350.00.Current price is: ₹300.00.
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JEEVAN KE INDRADHANUSH
JEEVAN KE INDRADHANUSH by Kusum Tiwari Jhalli (Author) Original price was: ₹250.00.Current price is: ₹200.00.

Shashwat Darshan by Suresh Kumar Dwivedi (Author)

Original price was: ₹350.00.Current price is: ₹300.00.

यह किताब ‘शाश्वत दर्शन’ आप सभी के समक्ष प्रस्तुत करते हुए काफी हर्षित हो रहा हूँ। शाश्वत दर्शन एक विचारधारा है जो सभी धार्मिक परम्पराओं में अच्छाई, सच्चाई और सुन्दरता की पुष्टि करती है। शाश्वत का अर्थ होता है जो कभी ना खत्म हो या जिसे कभी कोई मिटा ना सके। ईश्वर ही धर्मों का सार्वभौमिक स्रोत है। ईश्वर परम सत्य है। ईश्वर कालातीत है। ईश्वर शाश्वत है। और ईश्वर को किसी धर्म, सम्प्रदाय में नहीं बांधा जा सकता। ईश्वर इतना बड़ा और रहस्यमय है कि उसे सीमित नहीं किया जा सकता। सच पूछा जाए तो मैं कोई लेखक नहीं हूँ, जिस प्रकार से वर्षा ऋतु में पानी की बूंदें आकाश से धरती पर फिर वही नालों एवं नदियों के सहारे सागर का रुप धारण करती है । उसी प्रकार से मैं भी भिन्न-भिन्न धर्म ग्रंथों, महापुरुषों एवं धर्म के अनुयायियों से एक एक बूंद इकट्ठा करके सागर तो नहीं क्योंकि सागर का पानी खारा होता है हमने एक शीतल एवं स्वच्छ निर्मल नदी का रुप देने की कोशिश की है जिसका जल आप ग्रहण भी कर सकते हैं जरुरत पड़ने पर मन रुपी मैल भी धो सकते हैं।

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यह किताब ‘शाश्वत दर्शन’ आप सभी के समक्ष प्रस्तुत करते हुए काफी हर्षित हो रहा हूँ। शाश्वत दर्शन एक विचारधारा है जो सभी धार्मिक परम्पराओं में अच्छाई, सच्चाई और सुन्दरता की पुष्टि करती है। शाश्वत का अर्थ होता है जो कभी ना खत्म हो या जिसे कभी कोई मिटा ना सके। ईश्वर ही धर्मों का सार्वभौमिक स्रोत है। ईश्वर परम सत्य है। ईश्वर कालातीत है। ईश्वर शाश्वत है। और ईश्वर को किसी धर्म, सम्प्रदाय में नहीं बांधा जा सकता। ईश्वर इतना बड़ा और रहस्यमय है कि उसे सीमित नहीं किया जा सकता। सच पूछा जाए तो मैं कोई लेखक नहीं हूँ, जिस प्रकार से वर्षा ऋतु में पानी की बूंदें आकाश से धरती पर फिर वही नालों एवं नदियों के सहारे सागर का रुप धारण करती है । उसी प्रकार से मैं भी भिन्न-भिन्न धर्म ग्रंथों, महापुरुषों एवं धर्म के अनुयायियों से एक एक बूंद इकट्ठा करके सागर तो नहीं क्योंकि सागर का पानी खारा होता है हमने एक शीतल एवं स्वच्छ निर्मल नदी का रुप देने की कोशिश की है जिसका जल आप ग्रहण भी कर सकते हैं जरुरत पड़ने पर मन रुपी मैल भी धो सकते हैं।

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