Chalen Vedon Ki Aor By Arjundhar Dwivedi
₹400.00
Chalen Vedon Ki Aor: उस पुस्तक में गुरुदेव ने लिखा था, कि “आप गृहस्थ जीवन के दायित्वों का पालन करते हुए भी आत्मसाक्षात कर सकते है”, और एक दूसरे संदर्भ में गुरुदेव ने कहा…. चाहे मैं शरीर में रहूँ या न रहूँ, जो भी मेरे बताये पथ का अनुसरण करेगा, मैं अन्तःप्रेरणा बन कर उसका मार्ग दर्शन करता रहूँगा। इन्ही दो वाक्यों से प्रभावित होकर हमने सन् 1990 मार्च में हमने झारखंड (राँची) मुख्यालय योगदा सत्संग सोसाइटी से क्रियायोग की दीक्षा ग्रहण की। तब से आज तक सतत् साधना-रत हूँ। हमारे जीवन में सदगुरुदेव की कही दोनों बातें अक्षरसः सत्य हुई। सन् 2010 मार्च में अवकास ग्रहण करने के पश्चात् प्रयागशहर के उत्तरी-क्षेत्र में स्थित माँ गंगा के किनारे स्थित रसूलाबाद (तेलियरगंज) मे स्थाई निवास कर रहा हूँ। जीवन में जब भी अवसर मिला उत्तराखंड की नैसर्गिक सुखद यात्रायें की। अनेक संतो का आशीर्वाद भी मिला।
| Weight | 1 kg |
|---|---|
| Dimensions | 30 × 21 × 30 cm |
| book-author |
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